
गुमला: चैनपुर में निर्दोष युवक कयूम चौधरी की निर्मम पिटाई मामले में स्वतंत्र आवाज़ की खबर ने बड़ा असर दिखाया है। मीडिया में मामला प्रमुखता से आने के बाद पीड़ित परिवार सीधे झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने जब कयूम के पैरों में लगी प्लेट के ऊपर पड़े ताज़ा घाव और सूजन देखी तो मुख्य न्यायाधीश तरालोक चौहान और जस्टिस राजेश शंकर ने कड़ी नाराज़गी जताई।
हाईकोर्ट ने घटना को अति-गंभीर मानते हुए गुमला एसपी को सभी रिकॉर्ड, चैनपुर थाना के सीसीटीवी फुटेज और पूरी केस डायरी सहित कोर्ट में तलब किया है। अदालत ने पूछा कि बिना किसी आरोप और वारंट के युवक को 18 घंटे तक हाजत में क्यों रखा गया और उसके घायल पैरों पर लाठियां क्यों बरसाईं गईं।
स्वतंत्र आवाज़ की रिपोर्टिंग के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप मचा। गुमला एसपी हरीश बिन जमा और एसडीपीओ ललित मीणा मौके पर पहुंचे, पीड़ित परिवार से मुलाकात की और बयान दर्ज किए।
पीड़ित की पत्नी ने खुलासा किया कि कयूम के ससुर—जो एक केस में आरोपी हैं ,थानेदार पहले दो बार पकड़ चुका था और 20–20 हजार रुपये लेकर छोड़ देता था। पुलिस के इस व्यवहार पर सवाल उठते ही एसपी ने तुरंत बड़ी कार्रवाई करते हुए चैनपुर थाना प्रभारी कृष्ण कुमार को सस्पेंड कर दिया।
इसके साथ ही पुअनि दिनेश कुमार, सअनि नंदकिशोर महतो और सअनि निर्मल राय को लाइन हाजिर कर दिया गया है। उनकी जगह नए अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी गई है।
पीड़ित कयूम अभी रांची के पारस अस्पताल में भर्ती है, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। हाईकोर्ट की अगली सुनवाई में मामले का पूरा रिकॉर्ड पेश किया जाएगा।


