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एकड़ा नदी में भूधसान: BCCL अधिकारी पहुँचे, अस्थायी मरम्मत शुरू; नदी से छेड़छाड़ पर ग्रामीण करेंगे NGT में शिकायत

कतरास: एकड़ा नदी में भूधसान और दरार की खबर मिलने के बाद बीसीसीएल पीबी एरिया प्रबंधन तुरंत मौके पर पहुंचा और उक्त स्थल की अस्थायी मरम्मत शुरू करा दी। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल बालू की बोरियों से बहाव मोड़ा जा रहा है। उसके बाद दरार वाले हिस्से पर आरसीसी करने की प्रक्रिया की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यह उपाय कुछ दिनों के लिए राहत देगा, स्थायी समाधान आईआईटी – आईएसएम की रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा।

निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों ने कहा कि यह इलाका पुरानी भूमिगत खदानों का है। यहां वर्षों पहले कोयला उत्पादन हुआ था, जिससे नीचे की जमीन खोखली हो चुकी है। नदी का पानी भीतर रिसता रहा और जमीन कमजोर होकर धंसती गई। इसी वजह से एकड़ा नदी में बार-बार दरारें और भूधसान की घटनाएं सामने आ रही हैं।

वहीं एकड़ा दलित बस्ती के ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि पास में चल रही आउटसोर्सिंग सिंह नेचुरल कंपनी द्वारा लगातार की जा रही हेवी ब्लास्टिंग से यह भयावह स्थिति पैदा हुई है। ग्रामीणों के अनुसार नदी ही नहीं, घरों, मंदिरों और स्कूलों की दीवारों में भी दरारें साफ साफ दिखाई देती हैं। हमलोग कई बार सिजुआ एरिया प्रबंधन को आवेदन और मौखिक शिकायत देकर कहा है कि हमें किसी सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए।

हमारी जमीन रैयती है, मगर फिर भी हमारी बातों को अनसुना किया जा रहा है। प्रबंधन को हमलोगों की जान-माल का कोई परवाह नही है।

आईआईटी-आईएसएम से मांगी गई तकनीकी सलाह

पीबी एरिया ने अस्थायी समाधान के रूप में एचडीपी होम पाइप लगाने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा है। मुख्यालय ने प्रस्ताव को आईआईटी-आईएसएम भेजकर इसकी तकनीकी जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद स्थायी समाधान को लेकर आगे की कार्रवाई तय होगी। वही स्थानीय लोग उम्मीद जता रहे हैं कि इस बार वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर एकड़ा नदी और हरिजन बस्ती की समस्या का स्थायी और सुरक्षित समाधान निकलेगा।

नदी का बहाव थमने से बड़ी आबादी पर पड़ रहा है गंभीर असर

ग्रामीणों ने बताया कि आसपास के घरों की पूरी जरूरतें इसी नदी के पानी से पूरी होती हैं। पानी का स्रोत नीचे जाने से अब नहाने-धोने, पशु-पानी, खेती सब प्रभावित हैं। इसके अलावा, नदी के किनारे ही स्थित श्मशान घाट भी प्रभावित हो गया है।

ग्रामीणों ने कहा कि चिताएं जलाने में समस्या आ रही है। नदी से छेड़छाड़, प्रकृति से छेड़छाड़ के बराबर है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि वे लोग इस पूरे मामले को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में शिकायत करेंगे। जो भी अधिकारी या कंपनी इसमें दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।

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