रांची : “जल, जंगल और जमीन” की पुकार से शुरू हुआ आंदोलन आज 25 वर्ष की कहानी बन चुका है। 15 नवंबर 2000 को भारत के 28वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया झारखंड आज अपनी रजत जयंती मना रहा है। एक चौथाई सदी का यह समय राज्य के लिए विकास, संघर्ष, राजनीतिक अस्थिरता, संभावनाओं और चुनौतियों से भरी यात्रा रहा है। इस ऐतिहासिक मौके पर पूरे प्रदेश में उत्सव का माहौल है, लेकिन साथ ही राज्य के भविष्य को लेकर नए संकल्प भी लिए जा रहे हैं।
इस 25 साल के पड़ाव पर राज्य की बागडोर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथों में है, जिन पर अब झारखंड को नई दिशा और स्थिर विकास मॉडल देने की बड़ी जिम्मेदारी है।
झारखंड बनने की कहानी : अलग राज्य का जुनून कैसे हुआ पूरा
झारखंड राज्य का सपना किसी एक दिन में नहीं बना। यह एक संघर्ष, त्याग और जन आंदोलनों की लंबी यात्रा का परिणाम था। संथाल विद्रोह से लेकर बिरसा मुंडा के उलगुलान और उसके बाद 1970 के दशक में झारखंड आंदोलन की मजबूत नींव पड़ी।
1972 में शिबू सोरेन के नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना हुई। आदिवासी पहचान, विकास में भेदभाव, संसाधनों का दोहन और स्थानीय लोगों के हाशिए पर जाने की समस्याओं ने “अलग झारखंड” की मांग को और मजबूत किया।
1990 के दशक में आंदोलन ने गति पकड़ी, संसद और बिहार विधानमंडल में इस मुद्दे पर लगातार बहस होती रही। कई बार रेल चक्का जाम, प्रदर्शन, जनसभाएं और आंदोलन के कारण यह मुद्दा राष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उभरा। अखिल भारतीय झारखंड छात्र संघ (AISSF), JMM और विभिन्न जनजातीय संगठनों ने संयुक्त अभियान चलाया।
आखिरकार केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने झारखंड गठन का रास्ता साफ किया। संसद में विधेयक पास हुआ और 15 नवंबर 2000 को बिरसा मुंडा की जयंती पर झारखंड आधिकारिक तौर पर देश के नए राज्य के रूप में सामने आया।
25 वर्षों की उपलब्धियाँ : विकास की राह पर आगे बढ़ता झारखंड
खनिज आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूतीझारखंड आज भी देश के सबसे अधिक खनिज भंडार वाले राज्यों में गिना जाता है। कोयला, लौह अयस्क, तांबा, यूरेनियम, अभ्रक, बॉक्साइट और चूना पत्थर ने इसे औद्योगिक प्रदेश बनाया है। जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद और रांची देश की औद्योगिक रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं।
बुनियादी ढांचे में प्रगति
सड़क नेटवर्क, गांवों में बिजली पहुँच, शहरी विकास, फ्लाईओवर और आधुनिक स्टेडियम—बीते वर्षों में यह सब तेजी से हुआ। रांची एयरपोर्ट का विस्तार, देोगर एयरपोर्ट का संचालन और कई रेल परियोजनाएँ राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ रही हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य का विस्तार
रिम्स को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का दर्जानए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना IIM रांची, IIT (ISM) धनबाद, NUSRL, सेंट्रल यूनिवर्सिटी जैसे बड़े शिक्षा केंद्रछात्रों के लिए छात्रवृत्ति और सहायक योजनाएँकृषि और ग्रामीण विकासकई कृषि योजनाओं, सिंचाई परियोजनाओं और फसल सहायता कार्यक्रमों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।
सहकारी समितियों की भूमिका बढ़ी है और किसानों की आय में सुधार देखा गया है।
चुनौतियाँ : अनसुलझे सवाल अभी भी खड़े
नक्सलवाद, हालांकि काफी हद तक कम हुआ है, लेकिन कई क्षेत्रों में अभी भी सक्रिय है। बेरोजगारी, कुपोषण, जीविका के लिए पलायन, जनजातीय क्षेत्रों का पिछड़ापन, और स्वच्छ पेयजल जैसी समस्याएँ आज भी चुनौती बनी हुई हैं। राजनीतिक अस्थिरता भी झारखंड की पहचान रही है—25 वर्ष में 11 बार सरकारें बदलना विकास की गति को धीमा करता रहा है।
रजत जयंती पर राजनीतिक माहौल : हेमंत सोरेन पर बड़ी जिम्मेदारी
जब झारखंड 25 वर्ष का हुआ है, उसी समय राज्य के सामने सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से नई परिस्थितियाँ भी खड़ी हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने तीन बड़ी जिम्मेदारियाँ हैं:
1. स्थिर प्रशासन और भरोसे
मंद शासन झारखंड की राजनीति हमेशा गठबंधन और अस्थिरता से प्रभावित रही है। हेमंत सोरेन को यह साबित करना होगा कि राज्य स्थिर नेतृत्व के साथ तेज़ विकास कर सकता है।
2. उद्योग और रोजगार पर फोकस
खनन आधारित अर्थव्यवस्था को अब आधुनिक उद्योगों, स्टार्टअप, पर्यटन और MSME के साथ जोड़ने की जरूरत है। युवाओं के लिए रोजगार राज्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
3. आदिवासी अस्मिता और विकास का संतुलन
राज्य की आत्मा कृषि, परंपरा और जल-जंगल-जमीन में बसती है। उद्योग और विकास के साथ आदिवासी संस्कृति और अधिकारों की सुरक्षा हेमंत सरकार के लिए एक कठिन लेकिन जरूरी संतुलन है।
स्थापना दिवस के आयोजन : परंपरा, संस्कृति और नया संकल्प
राज्य स्थापना दिवस पर पूरे झारखंड में कार्यक्रमों की बाढ़ है। रांची के मोरहाबादी मैदान में मुख्य समारोह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, बिरसा मुंडा को नमन, वीर शहीदों की याद और विकास योजनाओं के उद्घाटन–प्रदेश में 25वीं वर्षगांठ को एक उत्सव की तरह मनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मौके पर कहा—“झारखंड 25 वर्ष का केवल इतिहास नहीं, बल्कि आने वाले 25 वर्षों का संकल्प है। हमारी पहचान हमारे संसाधन, हमारी संस्कृति और हमारी मेहनत है। हम मिलकर एक नया और बेहतर झारखंड बनाएंगे।”
25 वर्ष का झारखंड—सपनों का नया अध्याय
झारखंड ने कई मुश्किलों के बीच अपनी पहचान बनाई है। यह संघर्ष का प्रदेश है, पर मेहनत और उम्मीद का भी प्रदेश है। 25 वर्ष की यह यात्रा जहां उपलब्धियों का प्रमाण है, वहीं आने वाले वर्षों के लक्ष्यों की ओर भी संकेत करती है।
झारखंड की मूल शक्ति उसके लोग हैं—आदिवासी, किसान, मजदूर, युवा, और वह सब जो इस मिट्टी से जुड़े हैं। अब राज्य नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। और इस नए अध्याय के केंद्र में हैं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जिन पर झारखंड को स्थिर, मजबूत और विकसित राज्य बनाने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है।झारखंड की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है , यह तो बस शुरुआत है अगले 25 वर्षों की।


