
रांची: झारखंड राज्य स्थापना दिवस (15 नवंबर) के अवसर पर सरकार की ओर से प्रदेशभर में भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री की ओर से सभी मंत्रियों को अलग-अलग जिलों का प्रभारी बनाते हुए जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन इस सूची में दो नामों की अनुपस्थिति ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
राजद कोटे से मंत्री संजय यादव और कांग्रेस कोटे से मंत्री राधाकृष्ण किशोर का नाम इस सूची में नहीं है। दोनों वरिष्ठ नेताओं को कार्यक्रम की जिम्मेदारी न दिए जाने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जोरों पर हैं।
सूत्रों का कहना है कि इन दोनों मंत्रियों को सूची से बाहर रखना कोई साधारण प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों का संकेत हो सकता है। विशेष रूप से बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद झारखंड की सियासत में जो नई हवा चल रही है, यह फैसला उसी की आहट देता प्रतीत हो रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन सरकार के भीतर धीरे-धीरे मतभेद सतह पर आने लगे हैं। वहीं, विपक्ष इसे गठबंधन की कमजोरी के तौर पर पेश कर रहा है।
झारखंड में 15 नवंबर को बिरसा मुंडा जयंती और राज्य स्थापना दिवस दोनों का आयोजन होता है। ऐसे में कार्यक्रमों की जिम्मेदारी से दो मंत्रियों का बाहर रहना आने वाले दिनों में गठबंधन सरकार की दिशा और दशा तय करने वाला संकेत बन सकता है।


