संजीत यादव
रांची :झारखंड पुलिस मुख्यालय में पदस्थापित एक सिपाही राणा ने अवैध वसूली और बेहिसाब संपत्ति अर्जित करने का आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि राणा, पूर्व डीजीपी के समय गोपनीय शाखा में प्रभावशाली रहे इंस्पेक्टर गणेश सिंह के कथित वसूली नेटवर्क (सिंडिकेट) से जुड़ा हुआ था।
सूत्रों के अनुसार, राणा लंबे समय तक मुख्यालय में तैनात रहा। इसी दौरान उसने विभिन्न कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों और कोयला-रेत कारोबार से जुड़े लोगों से कथित तौर पर वसूली कर मोटी रकम कमाई। आरोप है कि यह रकम गोपनीय शाखा की फाइलों और संवेदनशील सूचनाओं के प्रबंधन के नाम पर वसूली जाती थी।
एसीबी की प्रारंभिक नजरभ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बीते दिनों इंस्पेक्टर गणेश सिंह पर प्रारंभिक रिपोर्ट (IR) दर्ज की थी। जांच आगे बढ़ने के साथ सिंडिकेट से जुड़े अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिकाएँ भी खंगाली जा रही हैं, जिनमें राणा का नाम प्रमुख रूप से सामने बताया जा रहा है।
बेहिसाब संपत्ति पर उठे सवाल
आरोप है कि राणा ने अपनी आय से कई गुना अधिक संपत्ति तैयार की है। ग्रामीण इलाके में जमीन और शहर में मकान/फ्लैट लग्जरी वाहन और परिवार के सदस्यों के नाम निवेश की है। फिलहाल, कागजी दस्तावेज़, बैंक खाते, और संपत्ति रजिस्ट्रियों की पड़ताल की जा रही है।
मुख्यालय में चर्चा तेज
पुलिस मुख्यालय और थानों के बीच इस मामले को लेकर चर्चा तेज है। सवाल यह भी उठ रहा है कि एक साधारण सिपाही इतनी तेजी से करोड़ों की संपत्ति कैसे बना सकता है?
अधिकारियों की चुप्पी
एसीबी अधिकारी फिलहाल जांच की गोपनीयता का हवाला देते हुए कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं कर रहे हैं।

