रांची: झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले में एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) की जांच लगातार तेज होती जा रही है। बुधवार को एसीबी ने राज्य के पूर्व उत्पाद सचिव और आईएएस अधिकारी मनोज कुमार से लंबी पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, उन्हें पहले नोटिस भेजकर तलब किया गया था, जिसके बाद वे आज एसीबी मुख्यालय पहुंचे।
इससे पहले इस घोटाले में पूर्व उत्पाद सचिव विनय चौबे को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में यह खुलासा हुआ है कि मेसर्स मार्शन इनोवेटिव सिक्योरिटी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स विजन हॉस्पिटैलिटी सर्विसेज नाम की कंपनियों ने 2023 में फर्जी बैंक गारंटी लगाकर शराब आपूर्ति और प्रबंधन से जुड़ा काम शुरू किया था। इससे सरकार को करीब 38 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान हुआ।
जांच में यह भी सामने आया है कि छत्तीसगढ़ की दो कंपनियों – मेसर्स दीशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स ओम साईं विबरेजेज प्राइवेट लिमिटेड को बिना संबंधित मंत्री की जानकारी के 11 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया, जबकि इन कंपनियों पर पहले से ही 450 करोड़ रुपये का बकाया था।
बताया जा रहा है कि यह भुगतान मनोज कुमार के उत्पाद सचिव रहने के दौरान हुआ था। एसीबी इस बात की तहकीकात कर रही है कि आखिर इतनी बड़ी वित्तीय गड़बड़ी में किस स्तर तक मिलीभगत रही और किसने इसे मंजूरी दी। एसीबी सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस घोटाले में कई और बड़े नामों से पर्दा उठ सकता है।


