रांची :हजारीबाग में वन भूमि की खरीद-बिक्री से जुड़े बड़े घोटाले की जांच में अब भाजपा के हजारीबाग सदर विधायक प्रदीप प्रसाद का नाम भी सामने आया है। यह वही मामला है जिसमें एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने पहले ही कारोबारी विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, आईएएस अधिकारी विनय चौबे और कई अन्य अफसरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, विधायक प्रदीप प्रसाद उस रजिस्ट्री दस्तावेज के गवाह थे, जिसके जरिए विवादित वन भूमि का सौदा हुआ था। एसीबी को यह भी जानकारी मिली है कि विधायक ने खुद भी विनय सिंह के नाम पर कुछ जमीनों की खरीद की थी।
राजनीति में आने से पहले प्रदीप प्रसाद हजारीबाग के प्रमुख भूमि कारोबारियों में शुमार रहे हैं। जांच एजेंसी अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि 2010 में हुए सौदे के दौरान वन भूमि की खरीद-बिक्री और म्यूटेशन में किन स्तरों पर गड़बड़ियां हुईं। यह पूरा मामला उस समय का है जब आईएएस विनय चौबे हजारीबाग के उपायुक्त के पद पर तैनात थे।
जमीन सौदे के दस्तावेज में विधायक बने थे गवाह
दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, 10 फरवरी 2010 को हजारीबाग रजिस्ट्री ऑफिस में एक डीड दर्ज की गई थी डीड संख्या 1763/1710, बुक नंबर 1, वॉल्यूम नंबर 45, पेज 31 से 66 तक।
इसी डीड के जरिए विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह ने वन भूमि की रजिस्ट्री करवाई थी, जिसके गवाह भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद बने थे। बाद में इस भूमि की जमाबंदी अपने नाम कराई गई और उस पर नेक्सजेन शोरूम का निर्माण हुआ।
कई गिरफ्तार, कुछ अब भी फरार
एसीबी ने अब तक इस कांड (संख्या 11/2025) में 70 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें कारोबारी विनय सिंह, लैंड ब्रोकर विजय सिंह और तत्कालीन सदर अंचल अधिकारी शैलेश कुमार को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं कुछ आरोपित अब भी फरार बताए जा रहे हैं।
विवादित भूमि हजारीबाग सदर अंचल के थाना नंबर 252 में स्थित है। इसमेंखाता नंबर 95 के प्लॉट नंबर 1055, 1060, 848 (कुल 28 डिसमिल)औरखाता नंबर 73 के प्लॉट नंबर 812 (72 डिसमिल)शामिल हैं। यह जमीन बभनवे मौजा, हल्का नंबर 11 के अंतर्गत आती है।

