
संजीत यादव
रांची : कंधे पर वर्दी का भार नहीं, अब उम्मीदों का बोझ है, दिन गिनते-गिनते साल बीत गया, पर आदेश अब भी फाइलों में सो रहा है, हर सुबह उठते हैं इस आस में कि शायद आज आदेश आ जाए, पर शाम होते-होते फिर वही मायूसी लौट आती है, वर्दी अब भी टंगी है, धूल ज़रूर जमी है पर जुनून अब भी ज़िंदा है। यह कोई फिल्मी डायलॉग नहीं, बल्कि झारखंड पुलिस के 7वें बैच के 39 प्रशिक्षु डीएसपी (सीनियर डीएसपी) की सच्ची व्यथा है, जो ट्रेनिंग पूरी करने के एक साल बाद भी अपनी पहली पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं।
पोस्टिंग फाइलों में अटकी, अफसर इंतजार में
सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों की पोस्टिंग से जुड़ी फाइल पुलिस मुख्यालय से लेकर गृह विभाग तक अटकी हुई है। जिलों में डीएसपी स्तर के कई पद रिक्त हैं, बावजूद इसके प्रशिक्षु अफसरों को चार्ज नहीं दिया गया है। इससे उनका मनोबल गिरता जा रहा है। कई अफसरों का कहना है कि ट्रेनिंग के दौरान उन्हें कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने की तैयारी कराई गई थी, पर अब फील्ड में उतरने का मौका नहीं मिल रहा।
सुविधाएं अधूरी, अधिकार अस्पष्ट
अभी तक किसी को सरकारी आवास आवंटित नहीं हुआ
वाहन और स्टाफ की व्यवस्था अधूरी
डीएसपी का वेतन, पर जिम्मेदारी इंस्पेक्टर जैसी
अधिकार और दायित्व को लेकर स्पष्टता नहीं
सितारे चमक रहे, पर आदेश सो रहा
एक प्रशिक्षु अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, दिन गिनते-गिनते साल बीत गया, पर आदेश अब भी फाइलों में सो रहा है। हर सुबह उम्मीद होती है कि आज आदेश आ जाएगा, पर शाम होते ही मायूसी लौट आती है। वर्दी अब भी टंगी है, धूल ज़रूर जमी है, लेकिन जुनून अब भी जिंदा है।
सरकार से गुहार — जिम्मेदारी दीजिए,सेवा करने का मौका दीजिए
इन प्रशिक्षु डीएसपी ने सरकार से अपील की है कि उन्हें जल्द उनके पद और गरिमा के अनुरूप पोस्टिंग दी जाए। वे कहना चाहते हैं कि राज्य की कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में वे अपनी भूमिका निभाने को तैयार हैं, बस उन्हें अवसर मिले।
सूची तैयार, हरी झंडी का इंतजार
विभागीय सूत्रों की मानें तो डीएसपी पदस्थापन की सूची तैयार है। बताया जा रहा है कि छठ पूजा के बाद स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। करीब 200 डीएसपी के तबादले व पदस्थापन की सूची गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के पास भेजी गई है। ऊपर से स्वीकृति मिलते ही आदेश जारी होगा।
सवाल बरकरार : जब कमी है अफसरों की, तो इंतजार क्यों?
राज्य में पुलिस अधिकारियों की कमी की चर्चा अक्सर होती रहती है। ऐसे में जब प्रशिक्षित अफसर तैयार हैं, तो फिर उन्हें फील्ड में उतारने में देरी क्यों? सरकार और पुलिस मुख्यालय दोनों के लिए यह एक अहम सवाल बन गया है। अब 39 डीएसपी आज भी उम्मीद लगाए बैठे हैं —कब उनकी वर्दी को जिम्मेदारी का मौका मिलेगा।


