रांची: झारखंड के रामगढ़ जिले की सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) की सारूबेड़ा परियोजना में हो रहे करोड़ों रुपये के घोटाले की तहकीकात अब तकनीकी स्तर पर भी तेज हो गई है। गुजरात की कंपनी कृष्णा इंफ्रास्ट्रक्चर पर आरोप है कि उसने बिना कोई मशीनरी या संसाधन लगाए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर हासिल किए और कागजों पर मशीनें दिखाकर करोड़ों रुपये की पेमेंट ली।
मशीनें सिर्फ कागजों में
जांच में सामने आया है कि कंपनी ने जो भारी मशीनें—डोजर, एक्सकेवेटर, टिपर ट्रक और पेलोडर—कागजों में उपलब्ध कराई थीं, वे जमीन पर कहीं नजर नहीं आईं। झारखंड में टेंडर प्रक्रिया के दौरान इन मशीनों की लोकेशन, रजिस्ट्रेशन और फिटनेस की जांच की जानी थी, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया औपचारिकता भर साबित हुई।
स्थानीय एजेंसियों से मिली जानकारी के मुताबिक, KD KARMUR की कंपनी ने मशीनों की असलियत छुपाकर काम स्थानीय एजेंसियों से करवाया, जो अपनी मशीनों का इस्तेमाल करते थे। इस पूरे खेल में मशीनों के GPS डेटा और तस्वीरों में भी फर्जीवाड़ा किया गया।
तकनीकी टीम की बड़ी चूक
CCL की तकनीकी टीम का दायित्व था कि वह साइट पर जाकर मशीनों का भौतिक सत्यापन करे। लेकिन जांच से पता चला कि इस टीम ने केवल कागजों की पड़ताल की और काम को अप्रूवल दे दिया। इससे यह साफ होता है कि या तो तकनीकी जांच में लापरवाही हुई या जानबूझकर आंखें बंद की गईं।
स्थानीय एजेंसियों की भारी क्षति
स्थानीय ठेकेदारों ने इस खेल में भारी आर्थिक नुकसान झेला। RAJ YASHI CONSTRUCTION और MONIKA ENTERPRISES जैसी कंपनियों ने बताया कि मशीनरी नहीं होने के बावजूद काम करवाया गया, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। इस वजह से वे आर्थिक संकट में फंस गए और कई बार अपने संसाधन गिरवी रखना पड़ा।
क्या अब होगी कड़ी कार्रवाई?
अब यह सवाल उठता है कि क्या CCL प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। पीड़ितों ने केंद्रीय जांच एजेंसियों से इस पूरे घोटाले की फॉरेंसिक जांच की मांग की है, ताकि दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।

