रांची: सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) की परियोजनाओं में करोड़ों की ठगी के आरोपों के केंद्र में जो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह है KD KARMUR। गुजरात के जामनगर का रहने वाला यह व्यक्ति सिर्फ कंपनी का संचालक नहीं, बल्कि सियासी और दबंग तत्वों के साथ गहरा नाता रखने वाला विवादित शख्स माना जाता है।
सूत्रों के मुताबिक, KD KARMUR ने स्थानीय राजनेताओं और दबंगों के साथ मिलकर इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया है। उसकी कंपनी कृष्णा इंफ्रास्ट्रक्चर ने झारखंड में चार प्रमुख परियोजनाओं के टेंडर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल किए, और बिना खुद की कोई मशीनरी लगाए स्थानीय एजेंसियों के जरिये काम करवाकर करोड़ों रुपये हड़प लिए।
राजनीतिक संरक्षण का नेटवर्क
स्थानीय राजनेताओं की छत्रछाया में KD KARMUR को न केवल टेंडर दिलाए गए, बल्कि उसकी हरकतों पर कोई रोक-टोक भी नहीं हुई। जिला प्रशासन और CCL के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण कंपनी की गतिविधियां सवालों से परे रहीं।
एक स्थानीय नेता का कहना है, “KD KARMUR के साथ कई लोगों का रिश्ता है, इसलिए अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।” वहीं, पीड़ित ठेकेदारों का आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें धमकाया गया और उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे भी दर्ज कराए गए।
ठगी और अवैध वसूली का जाल
ठेकेदार RAJ YASHI CONSTRUCTION और MONIKA ENTERPRISES के अनुसार, उन्हें लगभग 15 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं मिला। KD KARMUR ने अपने प्रभाव से भुगतान रोककर इन कंपनियों को आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया। इसके अलावा, स्थानीय एजेंसियों को झूठे विवाद में उलझाकर वे चुप कराया गया।
उठ रहे हैं कई सवाल...
1. क्या बिना राजनीतिक संरक्षण इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा संभव था?
KD KARMUR की कंपनी ने चार प्रमुख परियोजनाओं में फर्जी दस्तावेजों के सहारे टेंडर कैसे हासिल किए, क्या यह सिर्फ सिस्टम की चूक थी या सुनियोजित साजिश?
2. CCL और जिला प्रशासन की भूमिका संदिग्ध क्यों लग रही है?
जब बिना संसाधन वाली कंपनी को ठेका मिला और करोड़ों का भुगतान किया गया, तो अधिकारी चुप क्यों बैठे?
3. ठेकेदारों के साथ हुई ठगी पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं?
15 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान रोके जाने और धमकियों की शिकायतों पर प्रशासन मौन क्यों?
4. क्या परियोजनाओं की मॉनिटरिंग सिर्फ कागज़ों तक सीमित थी?
CCL जैसी केंद्रीय एजेंसी में निगरानी की क्या भूमिका है, अगर ठेके बिना वैरिफिकेशन के ही पास हो जाएं?
5. KD KARMUR को संरक्षण देने वाले कौन हैं?किन राजनीतिक और प्रभावशाली चेहरों की शह पर यह खेल चलता रहा?
क्या इनका नाम सामने लाने से बच रही है जांच?
6. क्या इस पूरे नेटवर्क की जांच CBI या ED से नहीं होनी चाहिए?
जब मामला करोड़ों की ठगी और प्रशासनिक मिलीभगत तक पहुंच चुका है, तो क्या स्थानीय जांच पर्याप्त होगी?
कल पढ़े- कागजों में मशीन, जमीन पर धोखा: CCL घोटाले की तकनीकी पड़ताल


