रांची : झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप) की एडीजी प्रिया दुबे ने पुलिस मुख्यालय के आदेश को चुनौती देते हुए अपने अधीनस्थ सभी वाहिनियों के कमांडेंट को स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि राज्य के थानों में झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप), इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) और स्पेशल इंडियन रिजर्व बटालियन (एसआईआरबी) से प्रतिनियुक्त महिला सिपाहियों को मुंशी का कार्य करने के लिए न भेजा जाए।एडीजी ने चार अक्टूबर को जारी आदेश में कहा है कि जब तक उनके स्तर से इस मामले का निवारण नहीं हो जाता, तब तक किसी भी महिला पुलिसकर्मी को मुंशी के पद पर कार्य करने के लिए विरमित नहीं किया जाए।प्रिया दुबे ने अपने आदेश में उस पत्र का भी हवाला दिया है, जिसे उन्होंने पहले पुलिस मुख्यालय को भेजा था। उसमें उन्होंने आपत्ति जताई थी कि डीजीपी कार्यालय ने न तो उनकी सहमति ली और न ही उनके माध्यम से गठित बोर्ड की। इसके बावजूद जैप, आईआरबी और एसआईआरबी की 212 महिला सिपाहियों को राज्य के विभिन्न थानों में पदस्थापित करने का आदेश जारी कर दिया गया।
25 सितंबर को जारी हुआ था डीजीपी कार्यालय का आदेश
डीजीपी कार्यालय ने 25 सितंबर को एक आदेश जारी कर जैप, आईआरबी और एसआईआरबी की 212 महिला पुलिसकर्मियों को राज्य के विभिन्न थानों में मुंशी पद पर पदस्थापित करने का निर्णय लिया था। इससे पहले डीजी सीआईडी भी 89 महिला सिपाहियों को महिला थानों में प्रतिनियुक्त कर चुका है।एडीजी प्रिया दुबे ने इस आदेश का विरोध करते हुए 29 सितंबर को डीआईजी (कार्मिक) को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा कि जैप, आईआरबी, एसआईआरबी और एसआईएसएफ की प्रमुख वह स्वयं हैं, और इनके कर्मियों की प्रतिनियुक्ति का निर्णय उनके माध्यम से गठित बोर्ड की अनुशंसा पर ही होना चाहिए।
पूर्व के किसी डीजीपी ने ऐसा नहीं किया: एडीजी
प्रिया दुबे ने अपने पत्र में लिखा है कि अब तक के इतिहास में किसी भी डीजीपी ने इस प्रकार सीधे आदेश जारी कर वाहिनियों के कर्मियों की थानों में पदस्थापना नहीं की है। परंपरागत रूप से थानों में बल या मुंशी की तैनाती संबंधित जिले के एसपी द्वारा की जाती रही है।उन्होंने कहा कि डीजीपी कार्यालय का यह आदेश अनुचित और प्रक्रिया विरुद्ध है। ऐसे में उक्त आदेश का अनुपालन संभव नहीं है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।


