संजीत यादव
रांची: झारखंड कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की घोषणा के बाद संगठन में जबरदस्त हलचल मच गई है। सूची जारी होने के बाद कई नेताओं की नाराज़गी सामने आने लगी है। कांग्रेस के अंदरुनी सूत्रों की मानें तो यह घोषणा संगठन में बड़ी टूट की वजह बन सकती है, क्योंकि इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्षों से लेकर मंत्रियों और विधायकों की पसंद का खासा असर दिखा है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, सुखदेव भगत, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व सांसद धीरज प्रसाद साहू और विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप तक की पसंद का ध्यान रखा गया है। इससे उन नेताओं में असंतोष है जिनके सुझावों को दरकिनार कर दिया गया।कुछ जिलों में तो चयन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। चतरा और लातेहार जिलाध्यक्षों की कांग्रेस सदस्यता को लेकर ही सवाल उठ रहे हैं। वहीं, प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और राधाकृष्ण किशोर का भी स्पष्ट प्रभाव देखा गया है। हालांकि, राधाकृष्ण किशोर अपने पुत्र को जिलाध्यक्ष नहीं बनवा सके, जबकि केएन त्रिपाठी अपने भाई को जिलाध्यक्ष बनाने की कोशिश में असफल रहे। जामताड़ा में दीपिका बेसरा को मंत्री इरफान अंसारी की सिफारिश पर दोबारा जिलाध्यक्ष बनाया गया है। धनबाद में संतोष कुमार सिंह को विधायक अनूप सिंह की पैरवी पर मौका मिला है। देवघर में मुकुंद दास को प्रदीप यादव की पसंद पर जिलाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि उन्होंने कुछ महीने पहले ही कांग्रेस जॉइन की थी। इसी तरह कोडरमा में हाल में ही माले से आए प्रकाश रजक, गुमला में सुखदेव भगत के पूर्व प्रतिनिधि, साहेबगंज में आलमगीर आलम की पसंद और सरायकेला-खरसावां में राज बागची, जिन्हें कांग्रेस में आए एक साल भी नहीं हुआ है, को जिलाध्यक्ष बनाया गया है ,जिनकी पैरवी सुबोधकांत सहाय ने की थी। कांग्रेस के अंदर अब चर्चा जोरों पर है कि इन नियुक्तियों से पार्टी में असंतुष्ट नेताओं की तादाद बढ़ सकती है। सूत्रों का कहना है कि अगर स्थिति नहीं संभली तो आने वाले दिनों में कांग्रेस में बड़ी टूट देखने को मिल सकती है।


