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ADG प्रिया दुबे ने दिखाया पावर, पुलिस मुख्यालय के आदेश को दे डाली चुनौती, महिला मुंशियों के थानों में पदस्थापन लटका

रांची : झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप), इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) और स्पेशल इंडियन रिजर्व बटालियन (एसआईआरबी) की 212 महिला पुलिसकर्मियों को राज्य के थानों में मुंशी के पद पर पदस्थापित करने का मामला विवादों में घिर गया है। पुलिस मुख्यालय द्वारा 25 सितंबर को जारी इस आदेश पर जैप की एडीजी प्रिया दुबे ने कड़ी आपत्ति जताई है। एडीजी प्रिया दुबे ने इस आदेश को नियम विरुद्ध बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। उन्होंने साफ कहा कि आदेश जारी करने से पहले न तो उनकी सहमति ली गई और न ही इस संबंध में गठित बोर्ड को जानकारी दी गई। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि अब तक किसी भी डीजीपी ने थानों में मुंशी की प्रतिनियुक्ति के लिए इस तरह का आदेश नहीं दिया। परंपरा और नियमों के अनुसार सशस्त्र बल के जवानों की प्रतिनियुक्ति सिर्फ अपराध नियंत्रण के लिए की जाती रही है।

बोर्ड की अनदेखी पर आपत्ति

गौरतलब है कि जैप, आईआरबी और एसआईआरबी के पुलिसकर्मियों के स्थानांतरण के लिए 28 जनवरी 2025 को एडीजी प्रिया दुबे की अध्यक्षता में एक बोर्ड का गठन किया गया था। लेकिन बोर्ड की अनुमति लिए बिना ही महिला पुलिसकर्मियों का जिलों में पदस्थापन कर दिया गया। एडीजी ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि आदेश का अनुपालन संभव नहीं है।

पहले भी हुई थी प्रतिनियुक्ति

इससे पहले सीआईडी के तत्कालीन डीजी अनुराग गुप्ता ने 23 जुलाई 2024 और 3 जनवरी 2025 को 89 महिला सिपाहियों की प्रतिनियुक्ति महिला थानों में की थी। लेकिन एडीजी का कहना है कि वर्तमान आदेश नियम और स्थापित परिपाटी से भिन्न है।

पुलिस मुख्यालय का तर्क

पुलिस मुख्यालय ने महिला पुलिसकर्मियों को मुंशी पद पर पदस्थापित करने के पीछे संवेदनशीलता और संवाद क्षमता को कारण बताया था। इसके लिए करीब 500 महिला पुलिसकर्मियों से आवेदन लिए गए थे। योग्य पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण भी दिलाया गया, ताकि वे थाने में आने वाले लोगों से बेहतर संवाद कर सकें और उनकी समस्याओं के समाधान में सहयोग कर सकें।विवाद गहराने की आशंकाअब एडीजी प्रिया दुबे की आपत्ति के बाद आदेश रद्द होगा या लागू रहेगा, इसे लेकर संशय बना हुआ है। पुलिस महकमे में यह मुद्दा गरमा गया है और आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।

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