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पलामू शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का तांडव! डीईओ पर मनमानी व मनचाही पोस्टिंग के आरोप, नियम-कानून की उड़ाई धज्जियां

मेदिनीनगर : पलामू जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय में भ्रष्टाचार और मनमानी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। आरोप है कि नियम-कानून को ताक पर रखकर वार्डेन को हटाकर दूसरे शिक्षिका को वार्डेन बनाया गया है। वहीं कई ऐसी जरुरी फाइल है जो डीईओ एक माह से दबाकर रखे हैं। इस तरह की कई गड़बड़ियां की जा रही हैं, जिससे लाखों रुपये के लेन-देन की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों की माने तो वार्डेन को हटाने और रखने में पैसों की बोलियां रखी गयी थी। जिसने ज्यादा दिया उसकी ही पेस्टिंग डीईओ ने किया।

ताजा विवाद कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय से जुड़ा है। यहां आठ वार्डनों को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटा दिया गया और उनकी जगह दूसरी शिक्षिका को वार्डेन बनाया गया है। बताया जा रहा है कि जिन वार्डनों को हटाया गया, वे संबंधित विद्यालय में दो साल से भी कम समय से कार्यरत थीं। लेकिन डीईओ कार्यालय ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए उनके पिछले कार्यकाल को जोड़कर यह दिखाया कि उन्होंने समयसीमा पूरी कर ली है। यह सीधे-सीधे झारखंड सरकार की उस संकल्पना के खिलाफ है, जिसमें हर कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय को अलग यूनिट मानते हुए दो साल का कार्यकाल तय किया गया है।

केवल इतना ही नहीं, तृतीय हस्ताक्षरी नियुक्ति के मामले में विभाग द्वारा खुलेआम नियमों की अनदेखी की गई है। आरोप है कि कई शिक्षिकाओं को बार-बार तृतीय हस्ताक्षरी बनाया गया, जबकि वे वर्षों से इस पद पर बनी हुई थीं। उदाहरण के तौर पर, मोहम्मदगंज की वार्डेन पद पर कार्यरत शिक्षिका सविता कुमारी पाठक को प्रतिनियोजन तोड़कर छतरपुर के विद्यालय में तृतीय हस्ताक्षरी नियुक्त कर दिया गया। इसी तरह पांडू में प्रिया सिंह और सतबरवा में सुमन कुमारी जो पहले से तृतीय हस्ताक्षरी थीं, दोबारा वही जिम्मेदारी दे दी गई।हुसैनाबाद में स्थिति और भी गंभीर है। यहां एक ऐसी शिक्षिका वंदना पांडेय को तृतीय हस्ताक्षरी बना दिया गया, जिसकी सेवा अवधि एक साल भी पूरी नहीं हुई है। जबकि डीईओ कार्यालय के पूर्व के पत्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि कम से कम एक साल की सेवा अवधि पूरी करने के बाद ही वित्तीय प्रभार दिया जा सकता है।

इसके अलावा, 2023 और 2024 में नियुक्त शिक्षिकाओं के लिए टेट पास होना अनिवार्य शर्त थी, लेकिन इन नियमों को भी पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।सबसे गंभीर मामला मोहम्मदगंज झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय से जुड़ा है। यहां प्रतिनियोजित एक शिक्षिका दीपमाला को उसके मूल विद्यालय हुसैनाबाद भेजा गया है ताकि उसे वार्डेन का पद दे दिया जाए। इस पद के लिए भी पहले से सौदेबाजी की चर्चा जोरों पर है।

कई जनप्रतिनिधियों ने कहा है कि अधिकारियों की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नियम-कानून से ऊपर कोई नहीं है।इस बीच पलामू उपायुक्त समीर एस ने भी स्पष्ट किया है कि जो भी निर्णय होगा, वह नियमों के तहत होगा। किसी भी परिस्थिति में गलत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अब सवाल उठता है कि क्या डीईओ ने उपायुक्त को भी गलत जानकारी देकर गुमराह किया है? पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब जिले में शिक्षा विभाग से जुड़े लोग हतप्रभ हैं कि डीईओ कब किसको हटा दें।

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