रांची: झारखंड में पेसा एक्ट (PESA Act) को लागू नहीं किए जाने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर बुधवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि राज्य सरकार अब तक आदिवासी स्वशासन और ग्रामसभा को अधिकार देने वाले पेसा कानून को प्रभावी रूप से लागू नहीं कर पाई है, जो न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना है।
सरकार ने रखी बालू व लघु खनिज खनन पर लगी रोक हटाने की मांग
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत से आग्रह किया कि बालू और अन्य लघु खनिजों के खनन पर लगी अंतरिम रोक को हटाया जाए। सरकार का तर्क था कि इस प्रतिबंध के कारण विकास कार्य ठप पड़े हैं, राजस्व की भारी हानि हो रही है और कई पंचायतों में रोजगार के अवसर भी बाधित हो गए हैं।
कोर्ट ने फिलहाल आदेश नहीं दिया, अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को
अदालत ने सरकार की इस मांग पर तत्काल कोई आदेश पारित नहीं किया। न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई की तारीख 9 अक्टूबर 2025 निर्धारित की है। तब तक मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। झारखंड में यह मामला अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यह न केवल आदिवासी अधिकारों और ग्रामसभा की स्वायत्तता से जुड़ा है, बल्कि खनिज संसाधनों के दोहन और पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों को भी सीधे प्रभावित करता है।पेसा एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन ग्रामसभा को सशक्त बनाने के साथ-साथ आदिवासी समुदाय के परंपरागत अधिकारों की रक्षा की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।


