अभिषेक सिंह
पलामू :कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय का नाम सुनते ही मन में यह छवि बनती है कि यहां बेटियों को पढ़ाई के साथ सुरक्षित माहौल और पौष्टिक आहार मिलेगा। लेकिन हकीकत इससे एकदम उलट है। पलामू जिले के पिपरा प्रखंड स्थित कस्तूरबा आवासीय विद्यालय से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो व्यवस्था की पोल खोल देती है। यहां स्कूली बच्चियों को परोसा जा रहा है सड़ा-गला खाना, जिसमें कीड़े और पीलू तक पाए गए।

प्रशासन तक नहीं पहुंच रही आवाज
बच्चियों ने कई बार वार्डन और स्कूल प्रबंधन से शिकायत की, लेकिन नतीजा शून्य रहा। जिम्मेदार अधिकारी भी इस पर आंखें मूंदे हुए हैं। सवाल उठता है कि क्या प्रशासन तब हरकत में आएगा जब कोई बच्ची बीमार पड़ेगी?

सरकार की योजना, जमीन पर विफल
कस्तूरबा विद्यालय का उद्देश्य था कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को मुफ्त शिक्षा, सुरक्षित आवास और पौष्टिक भोजन मिले। लेकिन पलामू में यह योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है।
अभिभावकों का गुस्सा
ग्रामीण अभिभावकों ने कड़े शब्दों में कहा कि “अगर बेटियों को सुरक्षित और अच्छा भोजन नहीं मिल सकता तो सरकार को इस योजना का दिखावा बंद कर देना चाहिए। यहां मासूमों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है।”
सवाल जिम्मेदारों से
• कस्तूरबा विद्यालय में पौष्टिक भोजन के नाम पर बच्चियों को जहर क्यों परोसा जा रहा है?
•क्या जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने कभी हॉस्टल का औचक निरीक्षण किया?
•क्या खाना सप्लाई करने वाले माफियाओं पर कोई कार्रवाई होगी?
•कब तक मासूम बच्चियां जहरनुमा भोजन खाने को मजबूर रहेंगी?सरकारी फंड कहां जा रहा है?
यह मामला केवल एक स्कूल का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की पोल खोल रहा है। अब देखना होगा कि पलामू जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मानवाधिकार हनन पर कब और कैसी कार्रवाई करती हैं…


