झारखंड : राज्य के जेल व्यवस्था में पदोन्नति की स्थिति बेहद चिंताजनक है। कई जेल अधीक्षक पूरे सेवा काल में बिना एक भी प्रमोशन पाए सेवानिवृत्त हो गए। पड़ोसी राज्यों में जहां समय पर पदोन्नति मिलती है, वहीं झारखंड में अधिकारी बेसिक ग्रेड से ऊपर नहीं बढ़ पाए।झारखंड में 2012 में बनी नियमावली में स्पष्ट प्रावधान था कि जेल अधीक्षक को सेवा के दौरान कम से कम एक पदोन्नति अवश्य मिलेगी, लेकिन हकीकत यह रही कि किसी को भी उसका लाभ नहीं मिला। जबकि बिहार में 15 साल में जेल अधीक्षक डीआईजी तक पदोन्नत हो जाते हैं और आंध्र प्रदेश, तेलंगाना व उत्तर प्रदेश में भी समय पर प्रोन्नति मिलती रही।
हाल ही में कैबिनेट से पास नई नियमावली के अनुसार अब जेल अधीक्षक को पूरे सेवा काल में चार प्रोन्नति मिलनी चाहिए
–5 साल में सेंट्रल जेल अधीक्षक
10 साल में सीनियर सेंट्रल जेल अधीक्षक
15 साल में डीआईजी
17 साल में एडिशनल आईजी
10 जेल अधीक्षक बिना प्रोन्नति के हो गए सेवानिवृत्त
अब तक 10 जेल अधीक्षक अपने बेसिक ग्रेड पर ही रिटायर हो गए। इनमें अब्राहम मिंज (2008), बालमोहन नायक (2008), पुरुषोत्तम ठाकुर (2010), मधुसुदन हसन (2016), ओलिव ग्रेस कुल्लू (2016), रूपम प्रसाद (2018), दीपक विद्यार्थी (2019), अशोक चौधरी (2020), प्रवीण कुमार (2021) और हामिद अख्तर (2025) शामिल हैं।
इनमें से सहायक कारा महानिरीक्षक (एआईजी जेल) हामिद अख्तर ने दो वर्ष पहले ही पदोन्नति न मिलने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जो अभी भी लंबित है। वे हाल ही में रिटायर हो गए। वर्तमान में केवल एआईजी तुषार रंजन बचे हैं, जो 1993 में संयुक्त बिहार में जेल अधीक्षक बने थे और आज भी उसी पद पर हैं।
2016 के बाद 17 नई नियुक्तियाँ
वर्ष 2016 से अब तक 17 जेल अधीक्षक बहाल हुए हैं। इनमें कुछ अधिकारी प्रोन्नति के जरिए इस पद तक पहुंचे और सेवानिवृत्त भी हो गए। एक उदाहरण गणेश दास का है, जो कक्षपाल से लगातार प्रोन्नति पाते हुए जेल अधीक्षक बने।जेल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जब तक नियमावली का सही तरीके से पालन नहीं होगा, तब तक झारखंड में जेल अधीक्षकों की पदोन्नति की समस्या बनी रहेगी।


