✍️ विशेष संवाददाता | अंतरराष्ट्रीय/बिजनेस डेस्क
मध्य-पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच United States और Iran के बीच दो हफ्तों के सीजफायर का सीधा असर अब वैश्विक तेल बाजार पर दिखने लगा है। युद्धविराम की घोषणा होते ही कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे दुनिया भर में राहत की लहर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सीजफायर लंबे समय तक कायम रहता है, तो पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में भी उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
📉 अमेरिकी क्रूड में भारी गिरावट, 19% तक लुढ़के दाम
सीजफायर के तुरंत बाद अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिली।
- कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 91 डॉलर पर पहुंची
- कुल गिरावट करीब 26 डॉलर (19%)
- यह हाल के समय की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट संकेत देती है कि वैश्विक ऊर्जा संकट धीरे-धीरे कम हो सकता है।
ग्लोबल बेंचमार्क Brent Crude Oil में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है।
- कीमत 109 डॉलर से घटकर 92.82 डॉलर प्रति बैरल
- लगभग 15% से अधिक की गिरावट
- खाड़ी देशों में कई जगह तेल 100 डॉलर से नीचे
यह गिरावट बताती है कि बाजार ने सीजफायर को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।
🚢 हॉर्मुज स्ट्रेट खुला, सप्लाई चेन में सुधार
रणनीतिक जलमार्ग Strait of Hormuz के फिर से खुलने के बाद समुद्री जहाजों की आवाजाही सामान्य होने लगी है।
- रोजाना लाखों बैरल तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से
- भारत सहित कई देशों के जहाज इस रास्ते में फंसे थे
- LNG और LPG सप्लाई में सुधार की उम्मीद
इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटने के संकेत मिल रहे हैं।
🤝 कूटनीति की वापसी: पाकिस्तान करेगा मध्यस्थता
सीजफायर के साथ ही कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं।
- अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 7 अप्रैल से पहले ही युद्धविराम का ऐलान किया
- Pakistan को मध्यस्थ की भूमिका दी गई
- 10 अप्रैल से Islamabad में वार्ता प्रस्तावित
- ईरान ने समझौते के लिए 10 शर्तें रखीं
इन वार्ताओं के परिणाम पर ही आगे की स्थिति निर्भर करेगी।
💣 युद्ध की पृष्ठभूमि: परमाणु कार्यक्रम पर टकराव
इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब United States और Israel ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया।
- मुख्य विवाद: ईरान का परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल
- तीन दौर की वार्ता असफल
- 40 दिनों तक चला संघर्ष
- 7 अप्रैल तक जारी रही जंग
इस दौरान पूरे विश्व में ऊर्जा संकट गहरा गया था।
⛽ भारत पर क्या असर?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ेगा।
- पेट्रोल-डीजल के दाम घट सकते हैं
- LPG सिलेंडर सस्ता हो सकता है
- परिवहन लागत कम होने से महंगाई पर असर
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर धीरे-धीरे देखने को मिलेगा।
