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सिमडेगा का कटहल देशभर में मशहूर, बिहार-यूपी तक रोज 50 टन आपूर्ति

बंपर पैदावार से किसानों की बढ़ी आमदनी, तीन महीने तक चलता है कारोबार

सिमडेगा/संवाददाता:
झारखंड के सिमडेगा जिले में इस बार कटहल की बंपर पैदावार ने किसानों के चेहरे खिला दिए हैं। यहां का कटहल अब केवल राज्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बिहार और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में अपनी खास पहचान बना चुका है। जिले से प्रतिदिन करीब 50 टन कटहल की आपूर्ति की जा रही है, जो लगातार तीन महीने तक जारी रहती है।

सिमडेगा से कटहल की खेप बिहार के डिहरी, बक्सर, आरा, पटना, गया, छपरा और बिहारशरीफ के अलावा उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, मऊ, जौनपुर, इलाहाबाद, दिलदारनगर, सुल्तानपुर और बाराबंकी जैसे शहरों में भेजी जा रही है। शुरुआत में जहां कटहल 120 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा था, वहीं अब आवक बढ़ने से कीमतों में कुछ गिरावट दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सिमडेगा जिले की अनुकूल जलवायु और उपजाऊ मिट्टी कटहल उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त है, जिससे यहां के फल का स्वाद और गुणवत्ता बेहतर होती है। यही वजह है कि अन्य राज्यों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

कटहल की बढ़ती मांग से स्थानीय किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है। यह खेती अब ग्रामीण क्षेत्रों में आय का मजबूत साधन बनती जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि सरकार से प्रोत्साहन और तकनीकी सहयोग मिले, तो कटहल की खेती को बड़े स्तर पर विकसित किया जा सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

कटहल की आपूर्ति भारत वेजिटेबल एंड फ्रुट कंपनी समेत अन्य माध्यमों से की जा रही है, जो स्थानीय स्तर पर फल एकत्र कर विभिन्न राज्यों के बाजारों तक पहुंचा रही हैं।

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