चुनाव से पहले राजद का बड़ा संगठनात्मक दांव, छात्र राजद भंग कर SSAI का गठन
नए छात्र विंग के जरिए देशभर में विस्तार की तैयारी, नवल किशोर यादव को मिली कमान
पटना: बिहार की राजनीति में चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए अपने छात्र संगठन CRJD (छात्र राजद) को भंग कर दिया है। इसके स्थान पर अब SSAI (Socialist Students Association of India) के नाम से नए छात्र संगठन का गठन किया गया है। इस फैसले की घोषणा नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने की, जिससे सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदलाव
तेजस्वी यादव ने बताया कि वर्ष 2006 में Supreme Court of India के एक फैसले के अनुसार कोई भी राजनीतिक दल अपने नाम से छात्र संगठन नहीं बना सकता। इसी के मद्देनज़र CRJD को समाप्त कर SSAI का गठन किया गया है, ताकि संगठन कानूनी दायरे में रहते हुए प्रभावी तरीके से काम कर सके।
देशभर में सक्रिय रहेगा नया संगठन
राजद का छात्र विंग पहले भी दिल्ली और Jawaharlal Nehru University जैसे संस्थानों में सक्रिय रहा है। अब SSAI के जरिए इसे राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करने की योजना है। पार्टी ने SSAI के अध्यक्ष पद पर नवल किशोर यादव को नियुक्त किया है, जो पेशे से शिक्षक हैं।
नया लोगो और पहचान
तेजस्वी यादव ने SSAI का नया लोगो और सिंबल भी लॉन्च किया। इसके माध्यम से संगठन को नई पहचान देने और युवाओं के बीच पकड़ मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
सीएम चेहरे पर तंज, सियासी हलचल तेज
बिहार में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर जारी चर्चाओं पर तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि “यहां तो हर कोई मुख्यमंत्री बनने में लगा है।” उन्होंने कहा कि जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, वह जनता के जनादेश के खिलाफ होगा।
नीतीश आवास पर नेताओं की आवाजाही पर निशाना
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि इस समय कई नेता लगातार Nitish Kumar के आवास का चक्कर लगा रहे हैं, जिससे राज्य की राजनीति में अस्थिरता बढ़ी है। उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में विकास कार्य ठप हैं और सरकारी खजाना खाली हो चुका है।
लालू केस पर टिप्पणी से बचाव
वहीं, Lalu Prasad Yadav से जुड़े लैंड फॉर जॉब मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने पर तेजस्वी यादव ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह न्यायिक मामला है और इसका जवाब अदालत में ही दिया जाएगा।
अब इस संगठनात्मक बदलाव को चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे राजद युवाओं और छात्र राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत करने की कोशिश में है।

